इतवाउत्तर प्रदेशगोंडागोरखपुरबस्तीबहराइचलखनऊसिद्धार्थनगर 

“विभाग की मौन सहमति, पर्यावरण को मिली चेतावनी: तेनुआ असनहरा में पेड़ों का कत्लेआम”

किसके इशारे पर उजड़ रहा है जंगल? वन विभाग की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल"

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। जंगल के रक्षक ही बने भक्षक? रामनगर रेंज में वन विभाग की नाक के नीचे चल रहा ‘पेड़ों का कत्लेआम’।।

रामनगर, बस्ती-यूपी

क्या वन विभाग का काम अब जंगलों की सुरक्षा करना नहीं, बल्कि अवैध कटाई के लिए ‘ग्रीन कॉरिडोर’ उपलब्ध कराना रह गया है? रामनगर रेंज के सोनाहा थाना क्षेत्र में ग्राम तेनुआ असनहरा में जो नजारा है, वह किसी डरावने सपने से कम नहीं है। हजारों की संख्या में हरे पेड़ों को काटकर जमीन पर गिरा दिया गया है, और वन विभाग के अधिकारी मूकदर्शक बनकर यह तमाशा देख रहे हैं।

📢खतरे में पर्यावरण, ठप हुआ ग्रामीणों का जीवन

यह केवल पर्यावरण का नुकसान नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित अपराध है। 10 मार्च 2026 की उस रात जो हुआ, वह साबित करता है कि माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। लकड़ियों को ढोने के लिए जिस गाड़ी (UP 55 AS 7543) का इस्तेमाल हुआ, क्या विभाग को उसका कोई सुराग नहीं मिला? कटाई के बाद छोड़े गए अवशेषों ने मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया है, जिससे बच्चों का स्कूल जाना दूभर हो गया है। ग्रामीणों के लिए यह रास्ता जीवन रेखा था, जिसे आज माफियाओं ने अपनी लूट के लिए बंद कर दिया है।

📢पर्यावरण का कत्ल, आम रास्ता हुआ अवरुद्ध

अवैध कटाई केवल पेड़ों तक सीमित नहीं रही। लकड़ियों से लदे वाहनों की आवाजाही और कटाई के बाद गिरे अवशेषों ने उस मुख्य मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है, जिससे होकर सैकड़ों ग्रामीण और मासूम बच्चे स्कूल जाते हैं। यह क्षेत्र अब आवागमन के लिए नारकीय बन चुका है।

📢सालों से सक्रिय माफिया, विभाग बना ‘दर्शक’

सबसे हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी कटाई उस इलाके में हो रही है जहाँ फॉरेस्ट गार्ड और वाचर्स की तैनाती है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सब कुछ अधिकारियों की जानकारी में हो रहा है। यदि जिम्मेदारों की नाक के नीचे बेशकीमती पेड़ों को काटकर रास्ता बंद किया जा रहा है, तो क्या इसे विभाग की लापरवाही माना जाए या माफियाओं के साथ उनकी ‘सांठ-गांठ’?

📢प्रशासन की अग्निपरीक्षा

प्रश्न यह नहीं है कि पेड़ क्यों कटे, प्रश्न यह है कि किसकी अनुमति से यह सब हुआ और अब तक दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों को सलाखों के पीछे भेजेगा, या फिर हमेशा की तरह इसे ‘लीपा-पोती’ करके फाइलों में दबा दिया जाएगा?

जनता अब केवल खोखले आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होगी। अवैध कटाई करने वालों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों—दोनों पर तत्काल प्रभाव से कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। यदि प्रशासन अभी भी नहीं चेता, तो ग्रामीणों का आक्रोश सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होगा।

📢विभाग से सवाल:

👉सुरक्षा बल कहाँ थे? जिस इलाके में फॉरेस्ट गार्ड और वाचर्स की तैनाती है, वहां इतनी बड़ी तादाद में पेड़ों की कटाई उनकी जानकारी के बिना कैसे हो गई?

👉किसके संरक्षण में पनप रहे माफिया? क्या यह संभव है कि विभाग की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध व्यापार फलता-फूलता रहे?

👉कार्रवाई या लीपा-पोती? क्या जिला प्रशासन इस मामले में कोई उच्च-स्तरीय जांच बिठाएगा, या हमेशा की तरह एक ‘फॉर्मल रिपोर्ट’ बनाकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे रहा है। यह मामला सिर्फ पेड़ों का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र के उस खोखलेपन का है, जो जनता की बुनियादी जरूरतों और पर्यावरण को माफियाओं के हाथों गिरवी रख चुका है।

अब देखना यह है कि क्या शासन-प्रशासन अपनी साख बचा पाएगा, या दोषियों को बचाने का पुराना खेल फिर से खेला जाएगा?

Back to top button
error: Content is protected !!